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Friday, April 5, 2024

आत्मपरिचय एवं बहु विकल्पीय प्रश्न उत्तर Atmparichay Ek Geet MCQs

 

आत्मपरिचय पर सार-आधारित प्रश्न





 

1 –मैं जग-जीवन का भार लिए फिरता हूँ,
फिर भी जीवन में प्यार लिए फिरता हूँ!
कर दिया किसी ने झंकृत जिनको छूकर
मैं साँसों के दो तार लिए फिरता हूँ!
मैं स्नेह-सुरा का पान किया करता हूँ,
मैं कभी न जग का ध्यान किया करता हूँ,
जग पूछ रहा उनको, जो जग की गाते,
मैं अपने मन का गान किया करता हूँ!

 

प्रश्न 1 – ‘मैं जग-जीवन का भार लिए फिरता हूँ’ पंक्ति से कवि का क्या तात्पर्य है?
(
क) जीवन में भरी भरकम काम करना
(
ख) जीवन में जिम्मेदारियों का बोझ उठाना
(
ग) सम्पूर्ण संसार की कठिनाइयों को उठाना
(
घ) जीवन का कष्टों से घिरा होना
उत्तर – (ख) जीवन में जिम्मेदारियों का बोझ उठाना


प्रश्न 2 – अपनी जिम्मेदारियों के बोझ को उठाते हुए भी कवि क्या कर लेता है?
(
क) सभी से अच्छे से बात कर लेता है
(
ख) सभी को अपने साथ लिए फिरता है
(
ग) अपने जीवन से प्रेम करता है
(
घ) अपने जीवन की जिम्मेदारियों से प्रेम करता है
उत्तर – (ग) अपने जीवन से प्रेम करता है


प्रश्न 3 – स्नेह-सुरा में कौन सा अलंकार है?
(
क) रूपक अलंकार
(
ख) अनुप्रास अलंकार
(
ग) उत्प्रेक्षा अलंकार
(
घ) मानवीकरण अलंकार
उत्तर – (क) रूपक अलंकार

प्रश्न 4 – ‘मैं कभी न जग का ध्यान किया करता हूँ’ कवि ने ऐसा क्यों कहा है?
(
क) क्योंकि कवि संसार से अलग चलता है
(
ख) क्योंकि कवि के अनुसार संसार में स्वार्थी व् चापलूस लोग भरे पड़े हैं
(
ग) क्योंकि कवि के अनुसार संसार पर ध्यान देना मूर्खता है
(
घ) क्योंकि कवि अपनी जिम्मेदारियों में उलझा हुआ है
उत्तर – (ख) क्योंकि कवि के अनुसार संसार में स्वार्थी व् चापलूस लोग भरे पड़े हैं

प्रश्न 5 – ‘जग पूछ रहा उनको, जो जग की गाते’ से कवि क्या कहना चाहते हैं?
(
क) संसार उन लोगों की स्तुति करता है जो संसार के अनुसार चलते हैं
(
ख) संसार का गुणगान करने से आधी समस्याएँ समाप्त हो जाती है
(
ग) संसार के लोग संसार का ही गुणगान करते हैं
(
घ) संसार में रहकर संसार की स्तुति करना आवश्यक हो जाता है
उत्तर – (क) संसार उन लोगों की स्तुति करता है जो संसार के अनुसार चलते हैं

 

2 –मैं निज उर के उद्गार लिए फिरता हूँ,
मैं निज उर के उपहार लिए फिरता हूँ!
है यह अपूर्ण संसार न मुझको भाता
मैं स्वप्नों का संसार लिए फिरता हूँ!
मैं जला हृदय में अग्नि, दहा करता हूँ,
सुख-दुख दोनों में मग्न रहा करता हूँ!
जग भव-सागर तरने को नाव बनाए,
मैं भव मौजों पर मस्त बहा करता हूँ!

प्रश्न 1 – ‘उर के उद्गार’ से कवि का क्या आशय है?
(
क) मन की भावनाएँ
(
ख) जीवन में जिम्मेदारियाँ
(
ग) मन की कठिनाइयाँ
(
घ) मन के कष्ट
उत्तर – (क) मन की भावनाएँ

प्रश्न 2 – ‘ उर के उपहार’ से क्या तात्पर्य है?
(
क) कवि के मन की भावना
(
ख) कवि को मिलने वाली भेंट
(
ग) कवि के मन की खुशियाँ
(
घ) कवि के जीवन की जिम्मेदारियाँ
उत्तर – (ग) कवि के मन की खुशियाँ

प्रश्न 3 – कवि को संसार क्यों अच्छा नहीं लगता?
(
क) क्योंकि कवि के अनुसार संसार अधूरा है
(
ख) क्योंकि कवि के अनुसार संसार नीरस है
(
ग) क्योंकि कवि के अनुसार संसार विस्तृत है
(
घ) क्योंकि कवि के अनुसार संसार दुखों से भरा है
उत्तर – (क) क्योंकि कवि के अनुसार संसार अधूरा है

प्रश्न 4 – कवि के अनुसार संसार क्यों अधूरा है?
(
क) क्योंकि संसार में प्रेम नहीं है
(
ख) क्योंकि संसार बनावटी हैं
(
ग) क्योंकि संसार स्वार्थी और चापलूसों से भरा है
(
घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी

प्रश्न 5 – ‘जग भव-सागर तरने को नाव बनाए’ से कवि क्या कहना चाहते हैं?
(
क) संसार के लोग भावनाओं रूपी सागर को पार करने के लिए कोशिश करते रहते हैं
(
ख) संसार के लोग भावनाओं रूपी सागर को पार करने के लिए नाव बनाते हैं
(
ग) संसार के लोग सागर को पार करने के लिए कोशिश करते रहते हैं
(
घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (क) संसार के लोग भावनाओं रूपी सागर को पार करने के लिए कोशिश करते रहते हैं

 

3 –मैं यौवन का उन्माद लिए फिरता हूँ,
उन्मादों में अवसाद लिए फिरता हूँ,
जो मुझको बाहर हँसा, रुलाती भीतर,
मैं, हाय, किसी की याद लिए फिरता हूँ!
कर यत्न मिटे सब, सत्य किसी ने जाना?
नादान वहीं है, हाय, जहाँ पर दाना!
फिर मूढ़ न क्या जग, जो इस पर भी सीखे?
मैं सीख रहा हूँ, सीखा ज्ञान भुलाना!

 

प्रश्न 1 – पद्यांश की पहली चार पंक्तियों में कवि ने क्या वर्णन किया है?
(
क) अपने मन के कष्टों को व्यक्त किया है
(
ख) अपने मन के अनुभव को व्यक्त किया है
(
ग) अपने जीवन के अनुभव को व्यक्त किया है
(
घ) अपने सुख-दुःख को व्यक्त किया है
उत्तर – (ख) अपने मन के अनुभव को व्यक्त किया है

प्रश्न 2 – पद्यांश की अंतिम चार पंक्तियों में कवि ने क्या बताया है?
(
क) अपने मन की भावना के बारे में
(
ख) अपनी प्रिय के बारे में
(
ग) अपने जीवन के विषय में
(
घ) सांसारिक जीवन के विषय में
उत्तर – (घ) सांसारिक जीवन के विषय में

प्रश्न 3 – ‘उन्मादों में अवसाद’ में कौन सा अलंकार है?
(
क) विरोधाभास अलंकार
(
ख) पुनरुक्ति अलंकार
(
ग) रूपक अलंकार
(
घ) उपमा अलंकार
उत्तर – (क) विरोधाभास अलंकार

प्रश्न 4 – पद्यांश में कवि किस सत्य को जानने की बात कर रहा है?
(
क) संसार के सत्य की
(
ख) कवि की प्रिय की
(
ग) जीवन-सत्य की
(
घ) सांसारिक वस्तुओं के सत्य की
उत्तर – (ग) जीवन-सत्य की

प्रश्न 5 – कवि सीखे हुए ज्ञान को क्यों भूलना चाहता है?
(
क) क्योंकि कवि अपनी मस्ती में रहना चाहता है
(
ख) क्योंकि कवि अपनी मस्ती में रहते हुए, अपने मन के अनुसार जीना चाहता है
(
ग) क्योंकि कवि सांसारिक वस्तुओं से ऊब चूका है
(
घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (ख) क्योंकि कवि अपनी मस्ती में रहते हुए, अपने मन के अनुसार जीना चाहता है

 

4 –मैं और, और जग और, कहाँ का नाता,
मैं बना-बना कितने जग रोज़ मिटाता!
जग जिस पृथ्वी पर जोड़ा करता वैभव,
मैं प्रति पग से उस पृथ्वी को ठुकराता!
मैं निज रोदन में राग लिए फिरता हूँ,
शीतल वाणी में आग लिए फिरता हूँ,
हों जिस पर भूपों के प्रासाद निछावर,
मैं वह खंडहर का भाग लिए फिरता हूँ।

 

प्रश्न 1 – पद्यांश में ‘मैं और, और जग और, कहाँ का नाता’ इस पंक्ति में आए तीन बार ‘और’ शब्द का क्या अर्थ है?
(
क) पहला “और” कवि के लिए, दूसरा “और” संसार के लिए, तीसरा “और” संसार और कवि के बीच का संबंध बताता है
(
ख) पहला “और” कवि के लिए, दूसरा “और” हमारे लिए, तीसरा “और” पाठको और कवि के बीच का संबंध बताता है
(
ग) पहला “और” पाठकों के लिए, दूसरा “और” संसार के लिए, तीसरा “और” संसार और पाठकों के बीच का संबंध बताता है
(
घ) पहला “और” कवि के लिए, दूसरा “और” संसार के लिए, तीसरा “और” पाठकों के लिए
उत्तर – (क) पहला “और” कवि के लिए, दूसरा “और” संसार के लिए, तीसरा “और” संसार और कवि के बीच का संबंध बताता है

प्रश्न 2 – ‘रोदन में राग’ और ‘शीतल वाणी में आग’ में कौन सा अलंकार है?
(
क) विरोधाभास अलंकार
(
ख) पुनरुक्ति अलंकार
(
ग) रूपक अलंकार
(
घ) उपमा अलंकार
उत्तर – (क) विरोधाभास अलंकार

प्रश्न 3 – ‘मैं बना-बना कितने जग रोज़ मिटाता!’ से कवि का क्या आशय है?
(
क) कवि घमंडी है जो संसार की परवाह नहीं करता
(
ख) कवि को संसार पर कविता लिखने का शोक है
(
ग) कवि अपनी कल्पना में नए-नए संसार बनाता और बिगाड़ता है
(
घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर – (ग) कवि अपनी कल्पना में नए-नए संसार बनाता और बिगाड़ता है

प्रश्न 4 – ‘मैं और, और जग और, कहाँ का नाता’ में कौन सा अलंकार है?
(
क) उपमा अलंकार
(
ख) पुनरुक्ति अलंकार
(
ग) रूपक अलंकार
(
घ) यमक अलंकार
उत्तर – (घ) यमक अलंकार 


 प्रश्न 5 – कवि किस खंडहर का वर्णन कर रहा है?
(
क) प्रेम महल के खंडहर
(
ख) राज महल के खंडहर
(
ग) महल के खंडहर
(
घ) जीवन के खंडहर
उत्तर – (क) प्रेम महल के खंडहर

 

5 –मैं रोया, इसको तुम कहते हो गाना,
मैं फूट पड़ा, तुम कहते, छंद बनाना!
क्यों कवि कहकर संसार मुझे अपनाए,
मैं दुनिया का हूँ एक नया दीवाना!
मैं दीवानों का वेश लिए फिरता हूँ,
मैं मादकता निःशेष लिए फिरता हूँ!
जिसको सुनकर जग झूम, झुके, लहराए,
मैं मस्ती का संदेश लिए फिरता हूँ!

प्रश्न 1 – संसार लेखक के रोने अर्थात दुःख को क्या समझता है?
(
क) प्रेम
(
ख) गीत
(
ग) शब्द
(
घ) मादकता
उत्तर – (ख) गीत

प्रश्न 2 – ‘क्यों कवि कहकर संसार मुझे अपनाए’ में कौन सा अलंकार है?
(
क) प्रश्न अलंकार
(
ख) पुनरुक्ति अलंकार
(
ग) रूपक अलंकार
(
घ) उपमा अलंकार
उत्तर – (क) प्रश्न अलंकार

प्रश्न 3 – कवि अपने आप को क्या कहलाना पसंद करता है?
(
क) उभरता हुआ कवि
(
ख) एक आम व्यक्ति
(
ग) एक नया दीवाना
(
घ) एक संदेशवाहक
उत्तर – (ग) एक नया दीवाना

प्रश्न 4 – कवि संसार को क्या सन्देश देता फिरता है?
(
क) प्रेम का
(
ख) झूमने का
(
ग) झुकने का
(
घ) मादकता का
उत्तर – (क) प्रेम का

प्रश्न 5 – कवि के संदेश से संसार पर उसकी क्या प्रतिक्रिया होती है?
(
क) संसार झूमता है
(
ख) संसार आनंद से लहराता है
(
ग) संसार झुकता है
(
घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (घ) उपरोक्त सभी

 

एक गीत पर सार-आधारित प्रश्न

1 –बच्चे प्रत्याशा में होंगे,
नीड़ों से झाँक रहे होंगे-
यह ध्यान परों में चिड़ियों के भरता कितनी चंचलता है!
दिन जल्दी-जल्दी ढलता है !
मुझसे मिलने को कौन विकल?
मैं होऊँ किसके हित चंचला?
यह प्रश्न शिथिल करता पद को, भरता उर में विहवलता हैं!
दिन जल्दी-जल्दी ढलता है!


प्रश्न 1 – पद्यांश में चिड़िया के घोंसले के कैसे दृश्य की कल्पना की गई हैं?
(
क) भोजन की आशा में घोंसलों से झांकते बच्चे
(
ख) तेजी से घोंसले की और आती चिड़िया
(
ग) बच्चों से भरा पूरा घोंसला
(
घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (क) भोजन की आशा में घोंसलों से झांकते बच्चे

प्रश्न 2 – चिड़िया के पंखों में चंचलता आने का क्या कारण है?
(
क) क्योंकि उन्हें अपने घोंसले की चिंता हो जाती है
(
ख) क्योंकि उन्हें अपने बच्चों की चिंता में बेचैनी हो जाती है
(
ग) क्योंकि उन्हें अपने घोंसले में रात होने से पहले पहुँचना है
(
घ) उपरोक्त सभी
उत्तर – (ख) क्योंकि उन्हें अपने बच्चों की चिंता में बेचैनी हो जाती है

प्रश्न 3 – ‘दिन जल्दी-जल्दी ढलता हैं’ से क्या आशय है?
(
क) दिन जल्दी गुजरता है
(
ख) सूर्य दिन में जल्दी ढलता है
(
ग) दिन का समय जल्दी निकलता है
(
घ) समय परिवर्तनशील है
उत्तर – (घ) समय परिवर्तनशील है

प्रश्न 4 – ‘मुझसे मिलने’ में कौन सा अलंकार है?
(
क) प्रश्नालंकार
(
ख) अनुप्रास अलंकार
(
ग) यमक अलंकार
(
घ) उपमा अलंकार
उत्तर – (ख) अनुप्रास अलंकार

प्रश्न 5 – ‘मैं होऊँ किसके हित चंचल?’ में कौन सा अलंकार है?
(
क) अनुप्रास अलंकार
(
ख) यमक अलंकार
(
ग) प्रश्नालंकार
(
घ) उत्प्रेक्षा अलंकार
उत्तर – (ग) प्रश्नालंकार

 

पाठ्यपुस्तक पर आधारित प्रश्न –


प्रश्न 1 – कविता एक ओर जग-जीवन का भार लिए घूमने की बात करती है और दूसरी ओर ‘मैं कभी न जग का ध्यान किया करता हूँ’-विपरीत से लगते इन कथनों का क्या आशय हैं?
उत्तर – कविता में एक ओर कवि जग-जीवन का भार लिए घूमने की बात करता है। जग-जीवन का भार लेने से कवि का आशय यह है कि वह अपने जीवन के सभी दायित्वों को निभा रहा है। वह भी एक आम व्यक्ति ही है, वह आम व्यक्ति से बिलकुल अलग नहीं है। जिस तरह एक आम व्यक्ति अपने सुख-दुख, लाभ-हानि आदि को झेलते हुए अपना जीवन यापन करता है कवि भी अपनी जीवन यात्रा इसी तरह पूरी कर रहा है। परन्तु कविता में दूसरी तरफ कवि कहता है कि वह कभी संसार की तरफ ध्यान नहीं देता, उसे संसार की कोई परवाह नहीं है। यहाँ पर कवि अपने जीवन के दायित्वों से मुँह मोड़ने की बात नहीं कर रहा है। बल्कि वह संसार की स्वार्थी व् चापलूसी भरी बातों पर ध्यान न देकर केवल प्रेम पर ध्यान देने की बात कर रहा है। इन दोनों पंक्तियों का आशय यह है कि कवि अपने आप को आम व्यक्तियों से अलग मानता है क्योंकि एक आम व्यक्ति सामाजिक बाधाओं से डरकर कुछ नहीं कर पाता। परन्तु कवि सांसारिक बाधाओं की परवाह न करते हुए अपने मन की करता है। इस प्रकार कह सकते हैं कि इन दोनों पंक्तियों के अपने-अपने अर्थ हैं और ये एक-दूसरे के विपरीत नहीं है।

 

प्रश्न 2 – जहाँ पर दाना रहते हैं, वहीं नादान भी होते हैं – कवि ने ऐसा क्यों कहा होगा?
उत्तर – नादान अर्थात मूर्ख व्यक्ति और दाना अर्थात ज्ञानी व्यक्ति। ‘जहाँ पर दाना रहते हैं, वहीं नादान भी होते हैं ‘ पंक्ति का आशय है कि समाज में मुर्ख और ज्ञानी दोनों ही तरह के व्यक्ति होते हैं।
एक ओर मुर्ख व्यक्ति सांसारिक मोह-माया में फसा रहता है। उसे यह ज्ञात होते हुए भी कि यह मोह-माया केवल एक भ्र्म है फिर भी वह इस मोह-माया के बंधन में फैसा रहता है। भौतिक सुख-सुविधाओं के पीछे भागते हुए वह अपने जीवन की राह से भटक जाते है। परन्तु इसके विपरीत, कुछ ज्ञानी लोग भी समाज में रहते हैं जो इस सांसारिक मोह-माया से दूर रहते हुए केवल प्रेम पूर्वक अपनी मस्ती में अपना जीवन जीते हैं और दूसरों को भी मोह-माया से दूर करने व् प्रेम बांटने का प्रयास करते रहते हैं।

 

प्रश्न 3 – मैं और, और जग और कहाँ का नाता – पंक्ति में ‘और’ शब्द की विशेषता बताइए।
उत्तर – मैं और, और जग और कहाँ का नाता – पंक्ति में ‘और’ शब्द का तीन बार प्रयोग हुआ है। पहले ‘और’ शब्द को कवि अपने लिए प्रयोग कर रहा है, जिसमें कवि स्वयं को आम व्यक्ति से अलग बताता है। वह आम व्यक्तियों की तरह सांसारिक भोग-विलास में नहीं फसता। दूसरा ‘और’ शब्द संसार के लिए प्रयोग किया गया है, जिसमें संसार की विशेषता को बताया गया है। तीसरे ‘और’ का प्रयोग ‘संसार और कवि में किसी तरह का संबंध है यह दर्शाने के लिए किया गया है। तीनों और शब्द का अर्थ अलग-अलग है, अत: यहाँ यमक अलंकार है।

 

प्रश्न 4 – शीतल वाणी में आग’ के होने का क्या अभिप्राय हैं?
उत्तर –  ‘शीतल वाणी में आग’ पंक्ति में कवि ने विरोधाभास अलंकार का प्रयोग किया है। कवि की वाणी भले ही शीतलता प्रदान करने वाली है, परंतु उसके मन में समाज के प्रति विद्रोह, असंतोष का भाव है। कवि प्रेम-रहित संसार को स्वीकार नहीं करता। कवि अपने शब्दों के माध्यम से लोगों के दिलों में उत्साह व जोश जगाने की असीम शक्ति रखता हैं। इसी कारण ‘शीतल वाणी में आग’ कहा गया है।


प्रश्न 5 – बच्चे किस बात की आशा में नीड़ों से झाँक रहे होंगे?
उत्तर – पक्षी दिन भर भोजन की तलाश में इधर-उधर भटकते रहते हैं। उनके बच्चे घोंसलों में माता-पिता की प्रतीक्षा करते रहते हैं क्योंकि उन्हें पता होता है कि उनके माता-पिता उनके लिए दाना लाएँगे। साथ-साथ वे छोटे बच्चे इस प्रतीक्षा में रहते हैं कि कब उनके माता-पिता आएंगे और कब उनके उनका स्पर्श व उनकी गोद, उनका प्रेम-प्रदर्शन भी असीम आनंद उन्हें मिलेगा। यही सब सोचते हुए और अपने माता-पिता की प्रतीक्षा करते हुए वे नीड़ों से झाँकते हैं।

 

प्रश्न 6 – ‘दिन जल्दी-जल्दी ढलता हैं’ – की आवृति से कविता की किस विशेषता का पता चलता हैं?
उत्तर – ‘दिन जल्दी-जल्दी ढलता है’ – की आवृत्ति से यह प्रकट होता है कि समय प्रगतिशील है वह किसी की प्रतीक्षा नहीं करता। कविता से हमें ज्ञात होता है कि जब व्यक्ति अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ता है तो उसे समय जल्दी-जल्दी बीतता प्रतीत होता है।
कविता में इस पंक्ति की एक और विशेषता यह भी है कि इस पंक्ति के कारण कविता में एक लय आती है जिससे कविता अधिक आकर्षक लगती है।

 

‘आत्मपरिचय और एक गीत’ कविता पर आधारित कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न – (Other Important Question Answers)


प्रश्न 1 – कवि जग-जीवन को भार क्यों समझता है?
उत्तर – कवि जग-जीवन को भार समझता है क्योंकि कवि संसार में जीवन का भार अर्थात सांसारिक कठिनाइयों अथवा जिम्मेदारियों का बोझ उठाता घूमता है जबकि कवि को इन जिम्मेदारियों को निभाने से अधिक अपने जीवन को प्रेम व् मस्ती से जीना पसंद है। जिस कारण कवि को जग-जीवन भार प्रतीत होता है।

 

प्रश्न 2 – कवि के मन को किसने झंकृत कर दिया?
उत्तर – कवि अपने जीवन को सितार की तरह मानते हैं, जिसके तारों को उनके अनुसार किसी ने छूकर कम्पित कर दिया है अर्थात छेड़ दिया है। और वे मानते हैं कि उनका जीवन इन्हीं तार रूपी साँसों के कारण चल रहा है। कहने का तात्पर्य यह है कि किसी प्रिय के द्वारा कवि के कोमल मन की भावनाओं को छू लेने से जो दिल में हलचल पैदा हुई है, उसी प्रेम से भरे हुए अपने जीवन को कवि जी रहा है।

 

प्रश्न 3 – कवि और संसार में क्या भिन्नता है, स्पष्ट कीजिए?
उत्तर – कवि के अनुसार उन्हें उनके जीवन में जो प्रेम मिला है। वे उसी प्रेम रूपी मदिरा अर्थात शराब को पीकर उसके नशे में मस्त रहते हैं। उन्होंने कभी संसार की परवाह नहीं की। क्योंकि कवि के अनुसार यह पूरा संसार उन्हीं लोगों को अधिक महत्व देता है या उन्ही को पूछता हैं जो संसार के अनुसार चलते हैं तथा उनका गुणगान करते हैं। लेकिन कवि अपने मन की इच्छा के अनुसार चलता है, अर्थात कवि वही करता है जो उसका मन कहता है। फिर दुनिया उनके बारे में क्या कहेगी, इसकी उन्होंने कभी परवाह नहीं की। कहने का तात्पर्य यह है कि कवि और संसार दोनों एक-दूसरे से बिलकुल अलग है।

 

प्रश्न 4 – कवि को कैसा संसार पसंद नहीं आता? और कवि कैसे संसार में रहना पसंद करता है?
उत्तर – कवि हर समय अपने हृदय के भावों को संसार के समक्ष लाने की कोशिश करता रहता है। कवि को जो प्रेम रूपी भेंट मिली है वह उसको हमेशा अपने दिल में लिए फिरता है। कवि के अनुसार यह संसार अधूरा है, जिस कारण उसको यह संसार पसंद नहीं आता। यही वजह है कि कवि अपनी कल्पना के संसार में खुश रहता है। कहने का तात्पर्य यह है कि कवि को स्वार्थी व् चापलूसी से भरे संसार में रहने से अधिक, अपनी कल्पना के संसार में (जहाँ प्रेम ही प्रेम भरा है) रहना पसंद है।

 

प्रश्न 5 – यौवन के उन्माद से कवि का क्या तात्पर्य है?
उत्तर – कवि अपनी जवानी के पागलपन की मस्ती में घूमता रहता है। इस पागलपन के कारण कवि अनेक दुखों व् निराशा का भी सामना करता है और वह इन दुखों व् निराशा को साथ में लिए घूमता है। अर्थात वह अपना जीवन दुखों व् निराश के साथ जी रहा है। कवि किसी प्रिय को याद करता रहता है जिसकी याद उसे बाहर से तो हँसा जाती है, परंतु उसका मन रो देता है अर्थात याद आने पर कवि का मन व्याकुल हो जाता है।

 

प्रश्न 6 – ‘नादान वहीं है, हाय, जहाँ पर दाना’ पंक्ति में कवि क्या बताना चाहता है?
उत्तर – इस संसार में लोगों ने सत्य को जानने की कोशिश की, परंतु कोई भी सत्य को नहीं जान पाया और बिना सत्य जाने ही इस संसार को छोड़ कर चले गए। कवि बताते हैं कि नादान अर्थात मूर्ख भी वहीं होते हैं जहाँ समझदार एवं चतुर होते हैं। कवि के कहने का तात्पर्य यह है कि हर व्यक्ति अपने स्वार्थ को पूरा करने के लिए वैभव, समृद्ध, भोग-विलास की तरफ भाग रहा है। वे इतना सत्य भी नहीं सीख सके हैं कि सांसारिक वस्तुएँ सदैव के लिए नहीं रहती। यह सब जानते समझते हुए भी अगर यह संसार कुछ सीख नहीं पाता हैं तो, फिर इसे मूर्ख ही कहा जायेगा। कवि कहते हैं कि वह इस बात को जान चुका है। उन्होंने इस दुनिया में रहते हुए जो भी सांसारिक बातें सीखी हैं, अब वह उनको भूलना चाहता है। क्योंकि कवि अपनी मस्ती में रहते हुए, अपने मन के अनुसार जीना चाहता है।

 

प्रश्न 7 – कवि का और संसार का क्या संबंध है?
उत्तर – कवि का और संसार का कोई संबंध नहीं है। कहने का तात्पर्य यह है कि कवि जिस तरह का व्यक्ति है, संसार उससे बिलकुल अलग है। अर्थात कवि और संसार में कोई समानता नहीं है। कवि हर रोज अपनी कल्पना के अनुसार संसार का निर्माण करता है, फिर उसे मिटा देता है। कवि कहता है कि यह संसार इस धरती पर सुख-समृद्धि के साधन इकट्ठे करता रहता है, उस धरती को कवि हर कदम पर ठुकराया करता है। कहने का तात्पर्य यह है कि कवि जिस धरती पर रहता है उसके अनुसार न चल कर उसके विपरीत व्यवहार करता है।


प्रश्न 8 – कवि को संसार की कौन सी बात समझ नहीं आती?
उत्तर – प्रेम की पीड़ा के कारण कवि के मन का रोना अर्थात मन की पीड़ा शब्द रूप में प्रकट हुई और उसके इस रोने को संसार ने गीत समझा। जब कवि की वेदना अधिक हो गई, तो उसने अपने दुख को शब्दों के माध्यम से व्यक्त करना चाहा और संसार इस प्रक्रिया को मात्राओं का निश्चित मान अनुसार पद्य रचना मानने लगी। कवि को यह समझ नहीं आ रहा है कि यह संसार उसे कवि के रूप में क्यों अपनाना चाह रहा है? क्योंकि कवि तो स्वयं को नया दीवाना कहता है जो इस दुनिया में मिलने वाली हर परिस्थितियों में मस्त रहता है।

 

प्रश्न 9 – कवि अपने आप को दीवाना क्यों कहता है?
उत्तर – कवि दीवानों का रूप धारण करके संसार में घूमता रहता है। उसके जीवन में जो प्रेम रूपी मस्ती शेष रह गई है, वह उसे लिए घूमता फिरता है। कवि उसी प्रेम रूपी मस्ती का सन्देश लिए फिरता है जिसको सुनकर सारा संसार झूम उठता है। कवि के प्रेम भरे गीतों की मस्ती सुनकर लोग प्रेम में झुक जाते हैं तथा प्रेम के आनंद से झूमने लगते हैं। कहने का तात्पर्य यह है कि कवि अपने मन के भावों को शब्दों में व्यक्त करता है और संसार के लोग उन शब्दों को गीत समझकर झूम उठते हैं।

प्रश्न 10 – लक्ष्य प्राप्ति की होड़ में समय जल्दी-जल्दी गुजरता हुआ प्रतीत होता है इसे कवि ने किस तरह समझाने का प्रयास किया है?
उत्तर – लक्ष्य प्राप्ति की होड़ में समय जल्दी-जल्दी गुजरता हुआ प्रतीत होता है इसे कवि समझाते हुए कहते हैं कि कहीं रास्ते में ही रात न हो जाए इस वजह से शाम होते देखकर यात्री तेजी से चलता है। यात्री को पता है कि उसकी मंजिल दूर नहीं है, इस कारण वह दिन भर थका होने के बावजूद भी जल्दी-जल्दी चलता है। कहने का तातपर्य यह है कि लक्ष्य-प्राप्ति के लिए पथिक अपने थके हुए शरीर के बावजूद भी मन में भी उल्लास, तरंग और आशा भर कर अपने पैरों की गति कम नहीं होने देता।

 

प्रश्न 11 – चिड़ियाँ दिन ढलने पर चंचल क्यों हो जाती हैं?
उत्तर – चिड़ियाँ दिन ढलने पर चंचल अर्थात अत्यधिक क्रियाशील हो उठती हैं। वे जितनी जल्दी हो सके अपने घोंसलों में पहुँचना चाहती हैं क्योंकि उन्हें ध्यान आता है कि उनके बच्चे भोजन की आशा में घोंसलों से बाहर झाँक रहे होंगे। यह ध्यान आते ही वे अपने पंखों को तेजी से चलती है क्योंकि दिन जल्दी जल्दी ढल रहा है और वे जल्दी-जल्दी अपने घोंसलों में पहुँच जाना चाहती हैं।

 

प्रश्न 12 – कवि अपने आप को थका हुआ क्यों महसूस करता है?
उत्तर – इस संसार में कवि अपने आप को बिलकुल अकेला मानता है। इस कारण कवि को लगता है कि उससे मिलने के लिए कोई भी परेशान नहीं होता, अर्थात कोई उसकी प्रतीक्षा नहीं करता, तो भला वह किसके लिए चंचल हो अर्थात किसके लिए भागकर घर जाए। कवि के मन में जैसे ही यह प्रश्न आता है तो उसे महसूस होता है कि उसके पैर ढीले हो गए हैं अर्थात कवि अपने आप को थका हुआ महसूस करता है।

 

‘आत्मपरिचय और एक गीत’ कविता पर आधारित कुछ बहुविकल्पीय प्रश्न और उत्तर (Other Multiple Choice Questions)

बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) 

 

प्रश्न 1 – ‘आत्मपरिचय’ कविता के कवि कौन हैं?
(
क) अमिताभ बच्चन जी
(
ख) हरिवंश राय बच्चन जी
(
ग) हरिश्चंद्र राय बच्चन जी
(
घ) पुरुषोत्तम राय बच्चन जी
उत्तर – (ख) हरिवंश राय बच्चन जी

 

प्रश्न 2 – कवि इस संसार में किसका भार लिए फिर रहा हैं?
(
क) जग-जीवन का
(
ख) प्रेम-रहित जीवन का
(
ग) जीवन की जिम्मेदारियों का
(
घ) जीवन के सुख-दुःख का
उत्तर – (क) जग-जीवन का

 

प्रश्न 3 – ‘जग-जीवन’ में कौन सा अलंकार हैं?
(
क) अनुप्रास अलंकार
(
ख) यमक अलंकार
(
ग) उत्प्रेक्षा अलंकार
(
घ) उपमा अलंकार
उत्तर – (क) अनुप्रास अलंकार

 

प्रश्न 4 – कवि ने कौन सा पान किया हैं?
(
क) मदिरा
(
ख) प्रेम
(
ग) स्नेह सुरा
(
घ) अनुराग सुरा
उत्तर – (ग) स्नेह सुरा

 

प्रश्न 5 – ‘स्नेह-सुरा’ में कौन सा अलंकार है?
(
क) यमक अलंकार
(
ख) रूपक अलंकार
(
ग) अनुप्रास अलंकार
(
घ) उपमा अलंकार
उत्तर – (ख) रूपक अलंकार

 

प्रश्न 6 – कवि किसकी परवाह नहीं करता है?
(
क) समाज की
(
ख) संसार की
(
ग) गाँव की
(
घ) घर की
उत्तर – (ख) संसार की

 

प्रश्न 7 – कवि के अनुसार ये दुनिया कैसे लोगों से भरी पड़ी है?
(
क) गरीब व अमीर लोगों से
(
ख) सच्चे व अच्छे लोगों से
(
ग) छोटे व बड़े लोगों से
(
घ) चापलूस व स्वार्थी लोगों से
उत्तर – (घ) चापलूस व स्वार्थी लोगों से

 

प्रश्न 8 – कवि के अनुसार यह दुनिया क्यों अपूर्ण या अधूरी है?
(
क) प्रेम का अभाव
(
ख) क्रोध का अभाव
(
ग) साथी का अभाव
(
घ) जीवन का अभाव
उत्तर – (क) प्रेम का अभाव


प्रश्न 9 – कवि अपने हृदय में सदैव क्या जला कर रखते हैं?
(
क) क्रोध रूपी अग्नि
(
ख) प्रेम रूपी अग्नि
(
ग) क्रान्ति रूपी अग्नि
(
घ) जीवन रूपी अग्नि
उत्तर – (ख) प्रेम रूपी अग्नि

 

प्रश्न 10 – ‘भव-सागर’ में कौन सा अलंकार है?
(
क) यमक अलंकार
(
ख) रूपक अलंकार
(
ग) अनुप्रास अलंकार
(
घ) उपमा अलंकार
उत्तर – (ख) रूपक अलंकार

 

प्रश्न 11 – ‘सुख-दुख’ में कौन सा समास है?
(
क) द्वंद समास
(
ख) तत्पुरुष समास
(
ग) अव्ययीभाव समास
(
घ) द्विगु समास
उत्तर – (क) द्वंद समास

 

प्रश्न 12 – कवि के यौवन के उन्माद में भी क्या छुपा हैं?
(
क) विरोध
(
ख) प्रेम
(
ग) अवसाद
(
घ) उवसाद
उत्तर – (ग) अवसाद

 

प्रश्न 13 – कवि की वाणी कैसी हैं?
(
क) उग्र
(
ख) कठोर
(
ग) शीतल
(
घ) अवसादी
उत्तर – (ग) शीतल

 

प्रश्न 14 – दुनिया कवि को किस रूप में अपनाती है?
(
क) कवि के
(
ख) ज्ञानी के
(
ग) नादान के
(
घ) विरोधी के
उत्तर – (क) कवि के


प्रश्न 15 – कवि दुनिया को कौन सा संदेश देना चाहते हैं?
(
क) उग्र भाव से जीवन जीने का
(
ख) कठिनाइयों का सामना करने का
(
ग) भौतिक सुख-सुविधाओं के साथ जीवन जीने का
(
घ) मौज मस्ती से जीवन जीने का
उत्तर – (घ) मौज मस्ती से जीवन जीने का


16. संसार के लोग पृथ्वी पर क्या जोड़ते हैं?

     
     
     
     

ANSWER= C. अर्थ

 

17. कवि कैसे संसार को ठुकराता है?

     
     
     
     

ANSWER= D. वैभवशाली

 

 

 

 

Wednesday, April 3, 2024

हरिवंश राय बच्चन आत्मपरिचय अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न:-

 हरिवंश राय बच्चन 



 Class 12 Hindi Aroh Chapter 1 काव्य भाग – आत्म-परिचय

कवि परिचय
हरिवंश राय बच्चन

जीवन परिचय-कविवर हरिवंश राय बच्चन का जन्म 27 नवंबर सन 1907 को इलाहाबाद में हुआ था। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अंग्रेजी विषय में एम०ए० की परीक्षा उत्तीर्ण की तथा 1942-1952 ई० तक यहीं पर प्राध्यापक रहे। उन्होंने कैंब्रिज विश्वविद्यालय, इंग्लैंड से पी-एच०डी० की उपाधि प्राप्त की। अंग्रेजी कवि कीट्स पर उनका शोधकार्य बहुत चर्चित रहा। वे आकाशवाणी के साहित्यिक कार्यक्रमों से संबंद्ध रहे और फिर विदेश मंत्रालय में हिंदी विशेषज्ञ रहे। उन्हें राज्यसभा के लिए भी मनोनीत किया गया। 1976 ई० में उन्हें ‘पद्मभूषण’ से अलंकृत किया गया। ‘दो चट्टानें’ नामक रचना पर उन्हें साहित्य अकादमी ने भी पुरस्कृत किया। उनका निधन 2003 ई० में मुंबई में हुआ।

रचनाएँ-हरिवंश राय बच्चन की प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं-

  1. काव्य-संग्रह-मधुशाला (1935), मधुबाला (1938), मधुकलश (1938), निशा-निमंत्रण, एकांत संगीत, आकुल-अंतर, मिलनयामिनी, सतरंगिणी, आरती और अंगारे, नए-पुराने झरोखे, टूटी-फूटी कड़ियाँ।
  2. आत्मकथा-क्या भूलें क्या याद करूं, नीड़ का निर्माण फिर, बसेरे से दूर, दशद्वार से सोपान तक।
  3. अनुवाद-हैमलेट, जनगीता, मैकबेथ।
  4. डायरी-प्रवासी की डायरी।

काव्यगत विशेषताएँ-बच्चन हालावाद के सर्वश्रेष्ठ कवियों में से एक हैं। दोनों महायुद्धों के बीच मध्यवर्ग के विक्षुब्ध विकल मन को बच्चन ने वाणी दी। उन्होंने छायावाद की लाक्षणिक वक्रता की बजाय सीधी-सादी जीवंत भाषा और संवेदना से युक्त गेय शैली में अपनी बात कही। उन्होंने व्यक्तिगत जीवन में घटी घटनाओं की सहजअनुभूति की ईमानदार अभिव्यक्ति कविता के माध्यम से की है। यही विशेषता हिंदी काव्य-संसार में उनकी प्रसिद्ध का मूलाधार है। भाषा-शैली-कवि ने अपनी अनुभूतियाँ सहज स्वाभाविक ढंग से कही हैं। इनकी भाषा आम व्यक्ति के निकट है। बच्चन का कवि-रूप सबसे विख्यात है उन्होंने कहानी, नाटक, डायरी आदि के साथ बेहतरीन आत्मकथा भी लिखी है। इनकी रचनाएँ ईमानदार आत्मस्वीकृति और प्रांजल शैली के कारण आज भी पठनीय हैं।

कविताओं का प्रतिपादय एवं सार
आत्मपरिचय

प्रतिपादय-कवि का मानना है कि स्वयं को जानना दुनिया को जानने से ज्यादा कठिन है। समाज से व्यक्ति का नाता खट्टा-मीठा तो होता ही है। संसार से पूरी तरह निरपेक्ष रहना संभव नहीं। दुनिया अपने व्यंग्य-बाण तथा शासन-प्रशासन से चाहे जितना कष्ट दे, पर दुनिया से कटकर मनुष्य रह भी नहीं पाता। क्योंकि उसकी अपनी अस्मिता, अपनी पहचान का उत्स, उसका परिवेश ही उसकी दुनिया है।

कवि अपना परिचय देते हुए लगातार दुनिया से अपने द्रविधात्मक और द्वंद्वात्मक संबंधों का मर्म उद्घाटित करता चलता है। वह पूरी कविता का सार एक पंक्ति में कह देता है कि दुनिया से मेरा संबंध प्रीतिकलह का है, मेरा जीवन विरुद्धों का सृामंजस्य है- उन्मादों में अवसाद, रोदन में राग, शीतल वाणी में आग, विरुद्धों का विरोधाभासमूलक सामंजस्य साधते-साधते ही वह बेखुदी, वह मस्ती, वह दीवानगी व्यक्तित्व में उत्तर आई है कि दुनिया का तलबगार नहीं हूँ। बाजार से गुजरा हूँ, खरीदार नहीं हूँ-जैसा कुछ कहने का ठस्सा पैदा हुआ है। यह ठस्सा ही छायावादोत्तर गीतिकाव्य का प्राण है।

किसी असंभव आदर्श की तलाश में सारी दुनियादारी ठुकराकर उस भाव से कि जैसे दुनिया से इन्हें कोई वास्ता ही नहीं है। सार-कवि कहता है कि यद्यपि वह सांसारिक कठिनाइयों से जूझ रहा है, फिर भी वह इस जीवन से प्यार करता है। वह अपनी आशाओं और निराशाओं से संतुष्ट है। वह संसार से मिले प्रेम व स्नेह की परवाह नहीं करता क्योंकि संसार उन्हीं लोगों की जयकार करता है जो उसकी इच्छानुसार व्यवहार करते हैं। वह अपनी धुन में रहने वाला व्यक्ति है। वह निरर्थक कल्पनाओं में विश्वास नहीं रखता क्योंकि यह संसार कभी भी किसी की इच्छाओं को पूर्ण नहीं कर पाया है। कवि सुख-दुख, यश-अपयश, हानि-लाभ आदि द्वंद्वात्मक परिस्थितियों में एक जैसा रहता है। यह संसार मिथ्या है, अत: यहाँ स्थायी वस्तु की कामना करना व्यर्थ है।

कवि संतोषी प्रवृत्ति का है। वह अपनी वाणी के जरिये अपना आक्रोश व्यक्त करता है। उसकी व्यथा शब्दों के माध्यम से प्रकट होती है तो संसार उसे गाना मानता है। संसार उसे कवि कहता है, परंतु वह स्वयं को नया दीवाना मानता है। वह संसार को अपने गीतों, द्वंद्वों के माध्यम से प्रसन्न करने का प्रयास करता है। कवि सभी को सामंजस्य बनाए रखने के लिए कहता है।

कविता: आत्मपरिचय :- (अर्थग्रहण संबंधी एवं सौंदर्यबोध संबंधी)

अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न:-

“मैं निज उर के उदगार लिए फिरता हूँ,

मैं निज उर के उपहार लिए  फिरता हूँ;

है यह अपूर्ण संसार न मुझ को भाता

मैं स्वप्नों का संसार लिए फिरता हूँ।”

क. "निज उर के उदगार" से कवि का क्या आशय है?

उत्तर- ‘निज उर के उद्गार’ से कवि का आशय है- प्रेम से परिपूर्ण वाणी। यह वाणी वह अपने प्रिय को देना चाहता है।

ख. कवि को संसार प्रिय क्यों नहीं है?

उत्तर- संसार में प्रेम और आत्मीयता का कोई स्थान नहीं है। संसार में पूर्णता नहीं है, इसलिए कवि को संसार प्रिय नहीं है।

ग. संसार की विषमताओं के बीच भी कवि कैसे जी रहा है?

उत्तर- संसार में बहुत कष्ट हैं। संसार से किनारा करके ही कवि खुशी से जी रहा है।

सौंदर्यबोध संबंधी प्रश्न:-

“मैं और जग और, कहाँ का नाता

मैं बना-बना कितने जग रोज मिटाता;

जग जिस पृथ्वी पर जोडा करता वैभव,

मैं प्रति पग से उस पृथ्वी को ठुकराता!”

 

क. काव्यांश का भाव सौंदर्य स्पष्ट कीजिए ।

उत्तर- प्रस्तुत काव्यांश हरिवंश राय बच्चन द्वारा रचित ‘आत्म-परिचय’कविता से लिया गया है,जिसमे कवि का दार्शनिक, मौलिक तथा कल्पनामयी रूप सामने आया है। इस काव्यांश में स्वयँ और जग के मध्य प्रेम और संघर्ष रूपी संबंधोँ के बारे में बात की गई है।

ख. प्रस्तुत काव्यांश की शिल्प संबंधी कोई दो विशेषताएँ लिखिए ।

उत्तर- ‘कहाँ का नाता’ में प्रश्नालंकार का प्रयोग है।

     ‘बना-बना’ में पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार है।

 

कविता की विषयवस्तु से संबंधित प्रश्नोत्तर :-

1. ‘आत्मपरिचय’ कविता दुनिया के साथ कवि की प्रीति-कलह की कविता है – कथन पर टिप्पणी कीजिए ।

उत्तर- ‘आत्मपरिचय’ शीर्षक कविता में कवि अपना परिचय देता है और कहता है कि वह समाज का अंग होते हुए भी उससे अलग है। स्वयं को जानना संसार को जानने से अधिक कठिन है। समाज से व्यक्ति का नाता कुछ खट्टा-मीठा तो होता ही है, पर जगजीवन से पूरी तरह निरपेक्ष रहना संभव नहीं है। कवि कहता है कि इस जग से हमारा संबंध द्विधात्मक और द्वंद्वात्मक रूप में होता है। कवि दुनिया में रहकर इसी से संघर्ष करता है। इस जीवन को अनेक विरोधाभासों के मध्य जीना पडता है। कवि इन विरोधाभासों के साथ सामंजस्य बिठाते हुए जीवन में मस्ती उतार लेता है। इसीलिए कवि इसे दुनिया के साथ प्रीति कलह की कविता कहता है।

2. मैं और, और जब और कहाँ का नाता- पंक्ति में और शब्द की विशेषताएँ बताइए।

उत्तर- यहाँ ’और’ शब्द का प्रयोग तीन अर्थों में प्रयुक्त हुआ है। पहले ‘और’ का अर्थ है- अन्य या भिन्न। पहले और तीसरे ‘और’ का अर्थ है- विशेष व सांसारिकता में डूबा हुआ आम मनुष्य। दूसरे ‘और’ का तात्पर्य है ‘तथा’ । इस प्रकार यह शब्द अनेकार्थी शब्दों के रूप में प्रयुक्त हुआ है।

3. शीतल वाणी में आग के होने का क्या अभिप्राय है ?

अथवा

  कवि क्यों कहता है- शीतल वाणी में आग लिए फिरता हूँ?

उत्तर- ‘शीतल वाणी में आग लिए फिरने’ का अभिप्राय है यह है कि उसकी वाणी में शीतलता भले ही दिखाई देती हो, पर उसमे आग जैसे जोशीले विचार भी भरे रहते हैं। उसके दिल में इस जग के प्रति विद्रोह की भावना तो है फिर भी वह जोश में होश नहीं खोता है। वह अपनी वाणी में शीतलता बनाए रखता है। यहाँ आग से अभिप्राय कवि की आंतरिक पीडा से है। वह अपने किसी प्रिय के वियोग की वेदना को ह्रदय में समाए फिरता है और यही वियोग की वेदना उसे निरंतर जलाती रहती है।पंक्ति ‘शीतल वाणी में आग’ में भले ही विरोधाभास है किंतु यह विरोधमूलक न होकर केवल विरोध का आभास मात्र ही है।

4. कविता में कवि एक ओर जग-जीवन का भार लिए घूमने की बात करता है और दूसरी  ओर मैं कभी न जग का ध्यान किया करता हूँ की बात की गई है- विपरीत से लगने वाले इन कथनों का क्या आशय है?

उत्तर- प्रस्तुत कविता आत्मपरिचय में हरिवंशराय बच्चन ने कहा है कि वह स्वयं को जग से जोडकर भी और जग से अलग भी महसूस करता है। वह इस बात को भली प्रकार से जानता है कि जग-जीवन से पूरी तरह से निरपेक्ष नहीं रहा जा सकता है। वह दूनिया से कटकर नहीं रह सकता। वह भी इसी दूनिया का एक अंग है। इसके बावजूद भी कवि जग की ज्यादा परवाह नहीं करता है। वह संसार के बताए इशारोँ पर नहीं चलता है। उसका अपना अलग व्यक्तित्त्व है और वह अपने मन के भावों को निडरता से प्रकट करता है कवि की स्थिति ऐसी है कि ‘मैं दुनिया में हूँ, पर दुनिया का तलबगार नहीं हूँ’

5. ‘जहाँ दाना रहते हैं, वहीं नादान भी होते हैं’- कवि ने ऐसा क्यों कहा होगा?

उत्तर- इस कविता में कवि ने ऐसा इसलिए कहा होगा क्योकि यह संसार स्वार्थी है और इसे जहाँ कुछ मिलता है वहीं जम जाता है। प्रस्तुत कविता में दाना का अर्थ अनाज भी है और चतुर व बुद्धिमान लोग भी। इस दृष्टि से इसका अर्थ हुआ कि जहाँ पर बुद्धिमान और चतुर लोग रहते हैं वहीं पर कुछ नादान (मूर्ख) भी रहते हैं। कवि कहना चाहते हैं कि इस संसार में सभी प्रकार के व्यक्ति रहते हैं कवि के अनुसार सांसारिक मोह-माया में लगा रहने वाला व्यक्ति ही नादान है और स्वविवेक से काम लेने वाला व्यक्ति ही चतुर है। फिर भी विरोधी होते हुए सभी प्राणी एक साथ सुखपूर्वक रहते हैं

 

दिन जल्दी-जल्दी ढलता है :-  

1. काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-               

दिन जल्दी जल्दी ढलता है

हो जाए न पथ में रात  कहीं

मंजिल भी तो है दूर नहीं 

यह सोच थका दिन का पंथी भी जल्दी-जल्दी  चलता है|

(क) काव्यांश का भाव सौंदर्य लिखिए|

उत्तर- भाव सौंदर्य - यह काव्यांश श्री हरिवंश राय बच्चन द्वारा रचित ‘एकगीत’ नामक कविता से अवतरित है इसमें कवि ने समय की परिवर्तनशीलता एवं जीवन की क्षणभंगुरता का स्पष्ट चित्रण किया है समय निरंतर चलायमान एवं परिवर्तनशील है वह प्रतिपल बदलता है यही धारणा लेकर   थका हुआ यात्री शीघ्रता से अपनी मंजिल की तरफ चलता है कि लक्ष्य पर पहुंचने से पहले देर ना हो जाए| 

(ख) काव्यांश का शिल्प-सौंदर्य लिखिए |

उत्तर- शिल्प-सौंदर्य - भाषा सरल एवं हिंदी की खड़ी बोली है, तत्सम तद्भव शब्दों का प्रयोग’ जल्दी-जल्दी में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है’ सार्थक एवं सटीक बिम्ब योजना है, मुक्तक छंद है |  

2. ‘दिन जल्दी-जल्दी ढलता है’ कविता में “एक ओर प्रकृति की वत्सलता झलकती है तो दूसरी ओर कविता की उदासी” टिप्पणी कीजिए।

उत्तर- यह कविता हरिवंश राय बच्चन के काव्य संग्रह ‘एक गीत’ में से ली गई है। इस कविता में कवि ने अपने व्यक्तिगत दुख को कविता का माध्यम बनाया है। यह कविता उनकी पहली पत्नी की अकाल मृत्यु से उत्पन्न दुख, वेदना, पीड़ा और एकाकीपन के बोध की अभिव्यक्ति है।  कवि को लगता है कि उसकी पत्नी स्वर्ग से आमंत्रित कर रही है, दिशा बोध दे रही है और कर्मपथ पर आगे बढने की प्ररणा दे रही है। इस कविता के दूसरे पहलू में प्रकृति की वत्सलता को भी दर्शाता है। उसके अनुसार पक्षी भी संध्या के समय अपने-अपने घोंसलों में पहुंचने की जल्दी में हैं। उन्हे घोंसलों में प्रतीक्षा करते अपने बच्चों की चिंता और आतुरता है। इसी से उनके पंखों में ताजगी और स्फूर्ति आ जाती है, जो उसे दिन ढलने से पहले ही घोंसलों में पहुंचने के लिए प्रेरित करती है।  कवि कहता है कि उसे पता ही नहीं चल पाता है कि कब दिन ढल गया है। रात भी लम्बी है। पथिक को भय है कि कही रास्ते में ही रात न हो जाए। दिन भर का थका मांदा पथिक रात के अंधकार के विषाद के आने से पहले ही अपनी मंजिल पर पहुंचना चाहता है। दिन जल्दी-जल्दी बीतता है अर्थात समय परिवर्तनशील है और वह किसी के लिए नहीं रुकता है।

3.  कविता ‘दिन जल्दी-जल्दी ढलता है’ में पक्षी तो घर लौटने को विकल है, पर कवि में           उत्साह नहीं है। ऐसा क्यो?

उत्तर- प्रस्तुत कविता ‘दिन जल्दी-जल्दी ढलता है’ में शाम को घर लौटते हुए पक्षियों को व्याकुल और आतुर बच्चों की याद आने लगती है और उनसे मिलने के लिए वे भी बेचैन हो जाते हैं, जिसकी वजह से उनके पंखों में तेजी व चंचलता आ जाती है और वे शीघ्र ही घर पहुंचने का प्रयास करने लगते हैं। इस कविता में आगे बताया गया है कि कवि के घर में उसकी प्रतीक्षा करने वाल कोई भी नहीं है। घर में उसके आने के इंतजार में कोई व्याकुल नहीं होगा और वह सोचने लगता है कि वह घर जाने की शीघ्रता क्यो करे। अतः पक्षी तो घर लौटने को व्याकुल है परंतु कवि में कोई उत्साह नहीं है|

प्रायः पूछे जाने वाले महत्त्वपूर्ण प्रश्न :-

1.   मैं और,और जग और , कहाँ का नाता........ भाव स्पष्ट कीजिए |

2.   कवि के ह्रदय के तारों को किसने छूकर झंकृत कर दिया होगा ?

3.   कवि कैसे जीवन की कामना करता है ?

4.   कवि और संसार के मध्य  कैसा संबंध है?

5.   शीतल वाणी में आग होने का क्या तात्पर्य है?

6.   जहाँ पर दाना रहते हैं वहीं नादान भी होते हैं- आशय स्पष्ट कीजिए |

7.   कवि ने अपने आप को किसका दीवाना कहा है और क्यों?

8.   बच्चें किस बात की आशा में नीड़ों से झाँक रहे होंगे?

9.   दिन जल्दी-जल्दी ढलता है – का अर्थ स्पष्ट कीजिए |

10. घर लौटते हुए कवि के कदम शिथिल क्यों हो जाते हैं?

लक्ष्मण-मूर्छा और राम का विलाप

  ( ख) लक्ष्मण-मूर्छा और राम का विलाप HINDI STUDY CLASS लक्ष्मण मूर्छा व राम का विलाप की व्याख्या -   दोहा – तव प्रताप उर राखि प्रभु , जैह...